Market crash क्यों होता है?स्टॉक मार्केट क्रैश का इतिहास

Market crash क्यों होता है?स्टॉक मार्केट क्रैश का इतिहास
स्टॉक मार्केट क्रैश होने के पीछे आर्थिक, वैश्विक और पैनिक सेलिंग जैसे मुख्य कारण होते हैं।

 

Market Crash क्यों होता है?

शेयर बाजार में निवेश करने वाले लगभग हर व्यक्ति ने कभी न कभी "मार्केट क्रैश" का नाम जरूर सुना होगा। जब शेयर बाजार अचानक बहुत तेजी से गिरता है और अधिकांश शेयरों की कीमतें कम समय में भारी मात्रा में नीचे आ जाती हैं, तो इसे मार्केट क्रैश कहा जाता है। मार्केट क्रैश निवेशकों के बीच डर, घबराहट और अनिश्चितता पैदा कर देता है।


कई बार लोग सोचते हैं कि बाजार अचानक बिना किसी कारण के गिर जाता है, लेकिन वास्तव में इसके पीछे आर्थिक, राजनीतिक, मनोवैज्ञानिक और वैश्विक कारण होते हैं। इतिहास में कई बड़े मार्केट क्रैश हुए हैं जिन्होंने दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है।

सरल भाषा में कहें तो जब बाजार में भारी मात्रा में बिकवाली होती है और प्रमुख इंडेक्स जैसे Nifty और Sensex बहुत तेजी से नीचे गिरते हैं, तो उसे Market Crash कहा जाता है।


मार्केट क्रैश क्या होता है?


जब किसी देश के शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स जैसे कि Nifty 50 या BSE Sensex कुछ दिनों या कुछ हफ्तों के अंदर 10%, 20% या उससे अधिक गिर जाते हैं, तो उसे मार्केट क्रैश कहा जाता है।


मार्केट क्रैश के दौरान:


शेयरों की कीमत तेजी से गिरती है।

निवेशक घबराकर शेयर बेचने लगते हैं।

बाजार में डर का माहौल बन जाता है।

कई कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन घट जाता है।

निवेशकों को भारी नुकसान हो सकता है।


मार्केट क्रैश होने के मुख्य कारण

1. आर्थिक मंदी (Economic Recession)


आर्थिक मंदी मार्केट क्रैश का सबसे बड़ा कारण होती है।


जब किसी देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होने लगती है, उद्योगों का उत्पादन कम हो जाता है, लोगों की नौकरियां जाने लगती हैं और कंपनियों का मुनाफा घटने लगता है, तब निवेशकों का भरोसा कम होने लगता है।


यदि निवेशकों को लगता है कि भविष्य में कंपनियां अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगी, तो वे अपने शेयर बेचने लगते हैं। इससे बाजार में गिरावट शुरू हो जाती है।


उदाहरण: 2008 की वैश्विक आर्थिक मंदी।


2. अत्यधिक महंगाई (High Inflation)


महंगाई बढ़ने का सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ता है।


जब वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो लोगों की क्रय शक्ति कम हो जाती है। कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और उनका मुनाफा कम होने लगता है।


ऐसी स्थिति में निवेशक भविष्य को लेकर चिंतित हो जाते हैं और बाजार में बिकवाली शुरू हो जाती है।


3. ब्याज दरों में वृद्धि (Interest Rate Hike)


किसी भी देश का केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ा सकता है।




भारत में यह काम Reserve Bank of India करता है।


जब ब्याज दरें बढ़ती हैं:


लोन महंगे हो जाते हैं।

कंपनियों की लागत बढ़ जाती है।

निवेश कम हो जाता है।

आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है।


इन कारणों से शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है।



4. निवेशकों में डर और घबराहट


मार्केट क्रैश का सबसे बड़ा मनोवैज्ञानिक कारण डर है।


जब कुछ बड़े निवेशक अपने शेयर बेचते हैं, तो छोटे निवेशक भी घबरा जाते हैं। वे सोचते हैं कि बाजार और नीचे जाएगा, इसलिए वे भी शेयर बेचने लगते हैं।


इसे Panic Selling कहा जाता है।


यह प्रक्रिया बाजार की गिरावट को और तेज कर देती है।


5. युद्ध और राजनीतिक अस्थिरता


जब किसी देश में युद्ध, आतंकवादी हमला या राजनीतिक संकट पैदा होता है तो बाजार पर नकारात्मक असर पड़ता है।


निवेशक अनिश्चितता पसंद नहीं करते।


युद्ध की स्थिति में:


. व्यापार प्रभावित होता है।

. तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।

. आर्थिक विकास धीमा हो सकता है।


इसी कारण बाजार में भारी गिरावट देखी जा सकती है।

6. वैश्विक घटनाएं


आज दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं।


यदि किसी बड़े देश की अर्थव्यवस्था में समस्या आती है तो उसका असर अन्य देशों पर भी पड़ता है।


उदाहरण के लिए:


* अमेरिका में मंदी

* चीन की आर्थिक कमजोरी

* वैश्विक बैंकिंग संकट

* महामारी


इन घटनाओं से दुनिया भर के बाजार प्रभावित हो सकते हैं।


7. शेयरों का अधिक मूल्यांकन (Overvaluation)


कई बार  शेयरों की कीमतें उनकी वास्तविक क्षमता से बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं।


जब निवेशक बिना कंपनी के प्रदर्शन को देखे सिर्फ तेजी की उम्मीद में निवेश करने लगते हैं, तब बाजार में एक बुलबुला (Bubble) बन जाता है।


जब यह बुलबुला फूटता है तो बाजार में भारी गिरावट आती है।



8. बड़े निवेशकों की बिकवाली


बड़े निवेशक और संस्थागत फंड बाजार में बड़ी मात्रा में निवेश करते हैं।


यदि वे अचानक अपने शेयर बेचने लगते हैं तो बाजार में भारी दबाव बन जाता है।


इससे शेयरों की कीमतें तेजी से गिर सकती हैं।


9. खराब कॉर्पोरेट परिणाम


यदि बड़ी कंपनियां अपेक्षा से कम मुनाफा दिखाती हैं तो निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ जाता है।


कंपनियों के खराब नतीजों के कारण:


शेयर गिरते हैं।

सेक्टर प्रभावित होता है।

पूरे बाजार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।


10. प्राकृतिक आपदाएं


भूकंप, बाढ़, सुनामी, महामारी और अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी बाजार को प्रभावित कर सकती हैं


इनसे:


उत्पादन रुक सकता है।

सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

आर्थिक गतिविधियां धीमी हो सकती हैं।


परिणामस्वरूप बाजार में गिरावट आ सकती है।


इतिहास के बड़े मार्केट क्रैश


                 1929 का महान क्रैश


इसे इतिहास का सबसे बड़ा शेयर बाजार क्रैश माना जाता है।


अमेरिका में शेयरों की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ गई थीं। जब निवेशकों का भरोसा टूटा तो बाजार में भारी बिकवाली शुरू हो गई।


इस घटना के बाद दुनिया ने महान आर्थिक मंदी (Great Depression) देखी।


2008 वाली संकट


यह संकट अमेरिकी हाउसिंग मार्केट से शुरू हुआ था।


बैंकों ने अत्यधिक जोखिम वाले लोन दिए थे। जब लोग लोन चुकाने में असफल हुए तो बैंकिंग सिस्टम पर संकट आ गया।


इसका असर पूरी दुनिया के बाजारों पर पड़ा।


2020 का कोविड-19 क्रैश


जब कोरोना महामारी फैली तो दुनिया भर में लॉकडाउन लग गए।


व्यापार बंद हो गए और निवेशकों में डर फैल गया।


कुछ ही दिनों में दुनिया के अधिकांश शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिली।


मार्केट क्रैश के दौरान क्या होता है?

          

निवेशकों में भय


लोग अपने निवेश को बचाने के लिए जल्दबाजी में शेयर बेचने लगते हैं।


लिक्विडिटी की समस्या


बाजार में खरीदार कम और विक्रेता ज्यादा हो जाते हैं।


कंपनियों के मूल्य में गिरावट


कई अच्छी कंपनियों के शेयर भी गिर जाते हैं।


मीडिया का प्रभाव


नकारात्मक खबरें डर को और बढ़ा देती हैं।


क्या मार्केट क्रैश हमेशा बुरा होता है?


नहीं


लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मार्केट क्रैश अवसर भी बन सकता है।


जब अच्छी कंपनियों के शेयर सस्ते हो जाते हैं, तब समझदार निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करते हैं।


इतिहास बताता है कि बड़े क्रैश के बाद बाजार अक्सर समय के साथ रिकवर भी करता है।


मार्केट क्रैश से कैसे बचें?

1. घबराकर शेयर न बेचें


भावनाओं में आकर निर्णय लेना नुकसानदायक हो सकता है।


2. अपने पैसे किसी एक कंपनी में न लगाए 


अपने पैसे को अलग-अलग सेक्टर और एसेट्स में निवेश करें।


3. इमरजेंसी फंड रखें


आपके पास 6 से 12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए।


4. SIP जारी रखें


गिरावट के समय SIP बंद करने के बजाय जारी रखना कई बार फायदेमंद साबित होता है।


5. मजबूत कंपनियों में निवेश करें


अच्छे बिजनेस मॉडल और मजबूत वित्तीय स्थिति वाली कंपनियां लंबे समय में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।


मेरी राय


मार्केट क्रैश शेयर बाजार का एक स्वाभाविक हिस्सा है। यह आर्थिक मंदी, महंगाई, ब्याज दरों में वृद्धि, युद्ध, वैश्विक संकट, निवेशकों की घबराहट और शेयरों के अधिक मूल्यांकन जैसे कई कारणों से हो सकता है। हालांकि क्रैश के दौरान बाजार में भारी गिरावट आती है, लेकिन इतिहास यह भी बताता है कि मजबूत अर्थव्यवस्थाएं और अच्छी कंपनियां समय के साथ फिर से उभरती हैं।


एक सफल निवेशक वही होता है जो बाजार की अस्थायी गिरावट से डरने के बजाय सही जानकारी, धैर्य और लंबी अवधि की सोच के साथ निवेश करता है। इसलिए मार्केट क्रैश को केवल खतरे के रूप में नहीं, बल्कि सीखने और अवसर पहचानने के रूप में भी देखना चाहिए।





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